गौ उपचार धाम
108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद तथा उनके परम शिष्य मुनि श्री अविचल सागर जी के मंगल प्रेरणा से "दया भावना फाउंडेशन" संचालित है ! जो 2020 से अपना कार्य कर रहा है! फाउंडेशन का मुख्य लक्ष्य है "भारत के प्रत्येक पशु-पक्षियों के लिए अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित बृहत गी अस्पताल तथा पक्षी अस्पतालों का निर्माण करना" भारत के किसी भी प्रदेश में इन लाखों करोड़ों पशु पक्षियों के लिए सुव्यवस्थित उपचार केंद्र नहीं है। आवाटा... परित्यक्त ..बीमार.. घायल.. एक्सीडेंटल पशुओं के उपचार हेतु और देखभाल के लिए समर्पित है ! दया भावना फाउंडेशन के नेतृत्व में गौ उपचार अस्पतालों के साथ-साथ उन पीड़ित पशुओं के उपचार उपरांत उनके जीवन भर देखभाल करने हेतु अनेकों गौशालाओं का भी कुशल संचालन करता है ! वर्तमान में दतिया... सोनागिरी.. ग्वालियर... झांसी... बजाना... ललितपुर.. अशोकनगर.. बामोर कला.. इन स्थानों पर सैकड़ो हजारों किलोमीटर .. हाईवे पर पशु पक्षी उपचार सेवा प्रदान कर रहा है ! इनमें 6500 से अधिक घायल पशु पक्षी संरक्षित किये जा चुके हैं ! दया भावना फाउंडेशन का लक्ष्य है "संपूर्ण भारतवर्ष में प्रत्येक राष्ट्रीय महामार्ग तथा प्रतीक जिले में प्रति सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर के अंतराल पर " गौ अस्पताल " एवं "पक्षी अस्पतालों" का निर्माण किया जाए ! फाउंडेशन भारत के प्रत्येक पशु पक्षियों को अत्याधुनिक उपचार उपकरणों से सुसज्जित अस्पतालों द्वारा औषधि उपचार प्रदान करना चाहता है ! तो आप सब इस दिव्य योजना में सहभागी होकर इसे पूर्ण करने का संकल्प करे !
दया भावना फाउंडेशन, गो रक्षा के सराहनीय कार्य में अपने प्रयासों को संयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है, तथा इन पूजनीय प्राणियों को एक घर, पोष्टिक भोजन, स्वच्छ जल, चिकित्सा देखभाल तथा सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने पर बल देता है
डोनेट करेंमनुष्यों ने अपने स्वयं के उपचार के लिये पर्याप्त सुविधाओं का निर्माण किया है परन्तु मूक, अनाश्रित, आवारा दुर्घटनाग्रस्त पशुओं के लिये अत्याधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध नहीं हैं । पशु पक्षी भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी की पीड़ा तो सहन कर ही रहे है, लेकिन उनके घाव - जख्मों पर एक चुटकी हल्दी लगाने वाला भी कोई नही है । हर जगह पशु पक्षियों को प्रताड़ित एवं कष्टप्रद होकर जीवन गुजारना पड़ रहा है ।
मनुष्य अपने चहुँमुखी विकास को साकार करने के लिये बड़े-बड़े मार्गों (हाइवे ) का निर्माण कर रहा है उन मार्गों पर ट्रक, ट्रेक्टर, ट्राला, डम्पर आदि वाहनों द्वारा पशुओं का घायल होना आम बात है जिसमें जानवरों के पैरों का कुचला जाना, हड्डी टूटना, गहरे घाव हो जाना, स्थाई विकलांगता के दर्द से इन गौ वंश को प्रतिदिन गुजरना पड़ रहा है, अहिंसा परमो धर्म को जयवंत करने वाले मुनि श्री 108 अविचल सागर महाराज जी की मंगल प्रेरणा एवं करुणामयी विचारों से दया भावना फाउण्डेशन आचार्य विद्यासागर गौ उपचार अस्पताल एवं श्रीराम पक्षी अस्पताल का निर्माण करने जा रहा है ।
डोनेट करें"मुनि श्री अविचल सागर जी के दया और करुणा से ओत प्रोत भाव है। भारत का कोई भी पशु या पक्षी बिना औषधि उपचार के ना रहे, उनका कहना है, ईश्वर आप को दया करते हुए देखना चाहते है "
एक ऐसा भारत निर्माण करना, जिसमें कोई भी पशु पक्षी बिना उपचार के पीड़ा में ना रहे। कोई भूखा ना रहे सभी पशुओं को समय पर चिकित्सा प्राप्त हो
| उद्देश्य | लक्ष्य राशि | अब तक एकत्र |
|---|---|---|
| आचार्य विद्याधार गो चिकित्सालय | 2.5 करोड़ | 68 लाख |
| भगवान श्रीराम पक्षी अस्पताल | 1 करोड़ | ₹27 लाख |
| मासिक भोजन सेवा | 5 लाख प्रति माह | 3.2 लाख (ongoing) |
"सेवा केवल कर्म नहीं, एक साधना है। जब हम किसी मूक प्राणी के घाव पर मरहम लगाते हैं, तब हम ईश्वर के सबसे करीब होते हैं।"
108 श्री अविचलसागर जी महाराज
जहां भूख मिटती है, वहां इंसानियत खिलती है।"
दिन न जाने कितने लोग केवल एक समय के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं - बच्चे, बुज़ुर्ग, अनाथ, झुग्गियों में रहने वाले परिवार और राहगीर ।
दया भावना फाउंडेशन का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति खाली पेट ना सोए।
हम प्रतिदिन ज़रूरतमंदों को स्वस्थ, शुद्ध और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की सेवा में लगे हैं- चाहे वह अस्पतालों के बाहर बैठे परिजन हों, सड़कों पर रहने वाले मजदूर या अनाथ बच्चे।
"सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है"
दया भावना फाउंडेशन में हमारा मानना है कि हर जीवन मूल्यवान है - चाहे वो किसी बुज़ुर्ग की अकेली ज़िंदगी हो, किसी अनाथ बच्चे की मासूम आँखें, या किसी लाचार व्यक्ति की दवा की ज़रूरत
हमारा उद्देश्य है कि हर असहाय को सहारा मिले, हर ज़रूरतमंद को गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।
"एक गोली, एक जीवन - हर पशु-पक्षी के जीवन की भी कीमत होती है"
आज भी भारत के कई गांवों और कस्बों में लाखों गायों, कुत्तों, पक्षियों और अन्य बेजुबानों को ज़रूरी दवाएं नहीं मिल पातीं।
घाव, संक्रमण, दर्द या अंदरूनी बीमारियों से वे तड़पते हैं – क्योंकि इलाज उपलब्ध नहीं होता । दया भावना फाउंडेशन का उद्देश्य है कि हर बीमार या घायल पशु-पक्षी को समय पर उचित दवा और देखभाल मिले।
विश्व वंदनीय महा तपखी.. युग श्रेष्ठ आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज जी के द्वारा 2004 में दिगंबर संन्यास प्राप्त कर मुनि श्री अविचल सागर जी ने कठोर व्रत, नियम, संयम, तप को धारण किया है। अध्यात्म की ऊंचाइयों को प्राप्त कर जगत कल्याण- प्राणी कल्याण की भावना से उनका हृदय भरा हुआ है।
गुरु शिक्षा, शास्त्र प्रमाण, प्रभु आज्ञा को प्राथमिकता देकर भारतीय संस्कृति, संस्कार, आध्यात्म की रक्षा तथा "अहिंसा परमो धर्म" और दया धर्म के मूल सिद्धांत को समझते हुए "दया भावना फाउंडेशन" की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य भारतवर्ष के प्रत्येक पशु-पक्षी को उपचार की सुविधा प्रदान करना है।
मनुष्यों ने अपने स्वयं के उपचार के लिए पर्याप्त सुविधाएं बना ली हैं, परंतु मूक, अनाश्रित, दुर्घटनाग्रस्त पशुओं के लिए कोई अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं है। पशु पक्षी भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी की पीड़ा तो सहन करते ही हैं, परंतु उनके घावों पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं ।
हाईवे पर ट्रकों, डम्परों आदि से दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को पैरों का कुचला जाना, हड्डी टूटना, घाव हो जाना जैसे दर्दनाक स्थितियों से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में दया भावना फाउंडेशन, मुनि श्री 108 अविचल सागर महाराज जी की प्रेरणा से "आचार्य विद्यासागर गौ उपचार अस्पताल' एवं 'श्रीटाम पक्षी अस्पताल का निर्माण करने जा रहा है।
भारत के प्रत्येक गांव, नगर और शहर में प्रत्येक प्राणी को औषधि और उपचार की सुविधा मिल सके।
इस लक्ष्य को साकार करने हेतु फाउंडेशन ने संकल्प लिया है कि:
प्रत्येक फोर लेन हाईवे एवं जिले में अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त पशु-पक्षी अस्पताल बनाए जाएं।
प्रत्येक 100 से 150 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर अस्पताल बनें।
संपूर्ण भारत में 108 पशु-पक्षी अस्पतालों का निर्माण किया जाए।
यह संकल्प आप सभी के सहयोग के बिना पूर्ण नहीं हो सकता।
भारत में लाखों-करोड़ों पशु-पक्षियों के लिए कोई सुव्यवस्थित उपचार केंद्र या अस्पताल नहीं है। इसके कारण वे पीड़ा, दर्द व तकलीफ में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
इसी आवश्यकता को देखते हुए मुनि श्री की प्रेरणा से "दया भावना फाउंडेशन" संचालित हो रहा है।
भारत में कहीं भी पशु-पक्षी उपचार हेतु पर्याप्त संख्या में अस्पताल नहीं है।
दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को लाने हेतु एम्बुलेंस सुविधा नहीं है।
प्रशिक्षित डॉक्टरों और गो-उपचारकों की भारी कमी है।
कोई ऐसा स्थान नहीं जहां घायल पशु को एडमिट करके पूर्ण रूप से उपचार दिया जा सके। प्राकृतिक संसाधनों से भोजन तो मिल जाता है, परंतु औषधि नहीं।
पीड़ा, महामारी, अपघात या बीमारी की स्थिति में भी कोई उपचार की व्यवस्था नहीं है।
हर अस्पताल के चारों ओर 100 किलोमीटर तक उपचार सुविधा उपलब्ध होगी। हाइड्रोलिक एंबुलेंस से घायल पशु को उपचार हेतु लाना आसान होगा। आधुनिक उपकरणों से उपचार एवं औषधि शीघ्र उपलब्ध होगी।
ऑपरेशन कक्ष में ऑपरेशन, पट्टी, प्लास्टर आदि की सुविधा होगी।
पक्षियों के लिए अलग उपचार कक्ष होगा।
प्रत्येक पशु-पक्षी को पूर्ण स्वस्थ होने तक एडमिट किया जा सकेगा।
स्वस्थ होने तक पौष्टिक भोजन, औषधि और सुरक्षा दी जाएगी।
राष्ट्रीय महामार्गों पर घूमने वाले पशुओं के लिए रेडियम बेल्ट लगाए जाएंगे।
उपचार के बाद पशु-पक्षियों को गौशालाओं में जीवन पर्यंत संरक्षित किया जाएगा।
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दया भावना फाउंडेशन के अस्पताल भारत वर्ष में निर्माण हो रहे है , वह प्रशंसनीय है
दया भावना फाउंडेशन के कार्य से परिचय करवाया , तथा उत्तर प्रदेश में गौ अस्पताल संबंधी चर्चाएं की
दया भावना फाउंडेशन के ट्रस्टी द्वारा भेट कर के , भारत के प्रत्येक फोर लाइन सिक्स लाइन पर अस्पताल निर्माण बाबत चर्चा की
दया भावना का कार्य दतिया जिले में सबसे सुंदर और सही मायने में हो रहा है । ऐसा अद्भुत कार्य भारत के प्रत्येक प्रदेश में होना चाहिए