आचार्य विद्यासागर गौ अस्पताल

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प्रवेश द्वार

मुख्य अस्पताल भवन

ऑपरेशन कक्ष

गौ विश्राम गृह

औषधि कक्ष

उपचार उपकरण

काऊ बेड

भूसा /पौष्टिक आहार

पोर्टेबल एक्स-रे मशीन

हैंगिंग मशीन 15

भूसा घर

एम्बुलैंस सेवा

बाइक

जल संग्रहण

हरा चारा कुट्टी मशीन

कूलर (3)

लाइट

कैमरा

जल व्यवस्था

पशु रसोई घर

तार फेंसिंग

स्टाफ रुम

तुला दान

1 फ्रिज

1 स्ट्रेचर

भक्ति संगीत

पक्षी अस्पताल भवन

साइन बोर्ड

भू दान

अस्पताल निर्माण हेतु 1 एकड़ भूमि की आवश्यकता

  • भारत का कोई भी व्यक्ति ,किसी भी स्थान पर अस्पताल निर्माण के लिए भूमि दान दे सकता है ।

विश्व वंदनीय.. महा तपस्वी ..युग श्रेष्ठ - आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज जी के द्वारा 2004 में दिगंबर संन्यास प्राप्त कर मुनि श्री अविचल सागर जी ने कठोर व्रत, नियम, संयम, तप को धारण किया है। अध्यात्म की ऊंचाइयों को प्राप्त कर - 'जगत कल्याण- प्राणी कल्याण' की भावना से उनका हृदय भरा हुआ है।

गुरु शिक्षा, शास्त्र प्रमाण, प्रभु आज्ञा को प्राथमिकता देकर भारतीय संस्कृति, संस्कार, आध्यात्म की रक्षा तथा "अहिंसा परमो धर्म" और दया धर्म के मूल सिद्धांत को समझते हुए "दया भावना फाउंडेशन" की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य भारतवर्ष के प्रत्येक पशु-पक्षी को उपचार की सुविधा प्रदान करना है।

गौ उपचार एवं पक्षी उपचार अस्पताल की आवश्यकता

मनुष्यों ने अपने स्वयं के उपचार के लिए पर्याप्त सुविधाएं बना ली हैं, परंतु मूक, अनाश्रित, दुर्घटनाग्रस्त पशुओं के लिए कोई अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं है। पशु-पक्षी भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी की पीड़ा तो सहन करते ही हैं, परंतु उनके घावों पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं।

हाईवे पर ट्रकों, डम्परों आदि से दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को पैरों का कुचला जाना, हड्डी टूटना, घाव हो जाना जैसे दर्दनाक स्थितियों से गुजरना पड़ता है।

ऐसे में दया भावना फाउंडेशन, मुनि श्री 108 अविचल सागर महाराज जी की प्रेरणा से "आचार्य विद्यासागर गौ उपचार अस्पताल" एवं "श्रीराम पक्षी अस्पताल" का निर्माण करने जा रहा है।

क्या आप को पता है?

भारत में लाखों-करोड़ों पशु-पक्षियों के लिए कोई सुव्यवस्थित उपचार केंद्र या अस्पताल नहीं है। इसके कारण वे पीड़ा, दर्द व तकलीफ में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

इसी आवश्यकता को देखते हुए मुनि श्री की प्रेरणा से "दया भावना फाउंडेशन" संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य है:

फाउंडेशन का मुख्य लक्ष्य

भारत के प्रत्येक गांव, नगर और शहर में प्रत्येक प्राणी को औषधि और उपचार की सुविधा मिल सके।

इस लक्ष्य को साकार करने हेतु फाउंडेशन ने संकल्प लिया है कि:

  • प्रत्येक फोर लेन हाईवे एवं जिले में अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त पशु-पक्षी अस्पताल बनाए जाएं।
  • प्रत्येक 100 से 150 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर अस्पताल बनें।
  • संपूर्ण भारत में 108 पशु-पक्षी अस्पतालों का निर्माण किया जाए।

यह संकल्प आप सभी के सहयोग के बिना पूर्ण नहीं हो सकता।

अस्पतालों की आवश्यकता

  • भारत में कहीं भी पशु-पक्षी उपचार हेतु पर्याप्त संख्या में अस्पताल नहीं हैं।
  • दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को लाने हेतु एंबुलेंस सुविधा नहीं है।
  • प्रशिक्षित डॉक्टरों और गौ-उपचारकों की भारी कमी है।
  • कोई ऐसा स्थान नहीं जहां घायल पशु को एडमिट करके पूर्ण रूप से उपचार दिया जा सके।
  • प्राकृतिक संसाधनों से भोजन तो मिल जाता है, परंतु औषधि नहीं।
  • पीड़ा, महामारी, अपघात या बीमारी की स्थिति में भी कोई उपचार की व्यवस्था नहीं है।

अस्पताल निर्माण से मिलने वाले लाभ

  • हर अस्पताल के चारों ओर 100 किलोमीटर तक उपचार सुविधा उपलब्ध होगी।
  • हाइड्रोलिक एंबुलेंस से घायल पशु को उपचार हेतु लाना आसान होगा।
  • आधुनिक उपकरणों से उपचार एवं औषधि शीघ्र उपलब्ध होगी।
  • ऑपरेशन कक्ष में ऑपरेशन, पट्टी, प्लास्टर आदि की सुविधा होगी।
  • पक्षियों के लिए अलग उपचार कक्ष होगा।
  • प्रत्येक पशु-पक्षी को पूर्ण स्वस्थ होने तक एडमिट किया जा सकेगा।
  • स्वस्थ होने तक पौष्टिक भोजन, औषधि और सुरक्षा दी जाएगी।
  • राष्ट्रीय महामार्गों पर घूमने वाले पशुओं के लिए रेडियम बेल्ट लगाए जाएंगे।
  • उपचार के बाद पशु-पक्षियों को गौशालाओं में जीवन पर्यंत संरक्षित किया जाएगा।

इस महान कार्य में आप सभी की भागीदारी आवश्यक है। अधिक जानकारी के लिए फाउंडेशन की वेबसाइट पर जाएं।

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